- ऑप इंडिया की रिपोर्ट से हुआ खुलासा, एबीसी न्यूज ने मानी गलती, दी सफाई
- भारत के संविधान को लेकर दर्शकों को एबीसी न्यूज के पत्रकार अवनी दास कर रही थी गुमराह
भारत के बाहर बैठ षणयंत्रकारी फेक न्यूज के माध्यम से भारत को
बदनाम करने की कोशिश में जुटे हुए है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है एबीसी न्यूज
का जिसकी एक रिपोर्टर अवनी दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए
भारत के संविधान के बारे में झूठी रिपोर्ट तैयार की है। इस मामले में ऑप इंडिया
न्यूज पोर्टल ने दो सप्ताह पहले रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके बाद एबीसी न्यूज ने
माना कि कथित पत्रकार अवनी डायस ने भारत के संविधान के प्रति दर्शकों को गुमराह
किया है और एबीसी न्यूज ने इस मामले में सफाई दी है। पढ़िये ऑप इंडिया की पूरी
रिपोर्ट...
गुरुवार (27 जून 2024) को एबीसी न्यूज
ने स्वीकार किया कि अवनी डायस ने ‘भारत की आजादी के साथ ही ‘सेकुलर’ शब्द संविधान का हिस्सा है’ का जो दावा किया है, वो झूठा है। एबीसी न्यूज ने
अवनी दास के फेक न्यूज पर सफाई देते हुए कहा कि ‘नरेंद्र मोदी पर बने डॉक्यूमेंट्री,
जिसे 5 जून को पब्लिश किया गया था, उसमें ‘भारत के मूल संविधान में सेकुलर’ होने का दावा गलत था।’
अपनी इज्जत बचाने के क्रम में एबीसी न्यूज ने लिखा, ‘भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 1960 के दशक के दौरान
पुष्टि की थी कि धर्मनिरपेक्षता भारत के 1950 के संविधान की
एक बुनियादी विशेषता है, इस शब्द को 1976 में एक संवैधानिक संशोधन में जोड़ा गया, जिससे भारत
का वर्णन “संप्रभु, लोकतांत्रिक
गणराज्य” से बदलकर “संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक
गणराज्य” हो गया।’
इस विवाद की शुरुआत 5 जून को हुई थी, जब एक तरफ पीएम मोदी तीसरी बार
प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे थे, तो दूसरी
तरफ भारत विरोधी शक्तियाँ भारत सरकार और खासकर मोदी सरकार को बदनाम करने के प्रयास
में लगातार जुटे हुए थे। इन्हीं प्रयासों में एक है ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग
कॉरपोरेशन (एबीसी) की कथित ‘पत्रकार’ अवनी
डायस द्वारा झूठ फैलाने का प्रयास, जिसमें अवनि ने 5 जून 2024 को भारत के संविधान के बारे में फर्जी
बातें प्रसारित की।
अवनी डायस ने कुछ समय
पहले ही ये फर्जी खबर फैलाई थी कि ‘निगेटिव
रिपोर्टिंग’ की वजह से भारत सरकार ने उनका वीजा रद्द कर दिया
है, जबकि वो दावा फर्जी निकला था। इस बार अवनि ने दावा किया
है कि ‘धर्मनिरपेक्षता’ भारतीय संविधान
का अहम हिस्सा है, वो भी अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद
यानी 1947 से। अवनी ने ‘नरेंद्र मोदी
से पहले के भारत की कहानी’ हेडलाइन के साथ एक वीडियो बनाकर
ये बताने की कोशिश की कि भारत में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की
धर्मनिरपेक्षता किस तरह के खतरे में है।
अपने वीडियो के 9.19 मिनट पर अवनी डायस ने कहा, “आपको बता दें कि जब 1947 में अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद भारत की स्थापना हुई थी, तो इसके संविधान में लिखा गया था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसका मतलब है कि धर्म के आधार पर देश में सभी को आजादी होनी चाहिए।” अवनी ने दावा किया कि भारत के संविधान में सेक्युलर शब्द पेज नंबर 33 पर बड़े अक्षरों में लिखा है।
हालाँकि अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही ‘पत्रकार’ अवनी ये भूल गई कि भारत का संविधान 1947
में लागू नहीं हुआ और जब भारत का संविधान 26 जनवरी
1950 को लागू हुआ, तब सेक्युलर शब्द उस
संविधान का हिस्सा ही नहीं था। बता दें कि भारत का संविधान 1947 में नहीं, बल्कि तीन साल बाद 1950 में लागू हुआ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा 1976 में
(आपातकाल के काले दिनों के दौरान) बनाया गया।
बता दें कि इसी साल अप्रैल में अवनी डायस ने एक्स (पूर्व में
ट्विटर) पर दावा किया था कि मोदी सरकार ने उनका वीजा नहीं बढ़ाया, जिसकी वजह से उन्हें भारत छोड़ना पड़ा। अवनी ने दावा किया कि ऐसा इसलिए
किया गया, क्योंकि उनकी रिपोर्टिंग सरकार को पसंद नहीं आ रही
थी। हालाँकि ये पूरी तरह से झूठ था, क्योंकि उन्होंने जैसे
ही वीजा के लिए अप्लाई किया, उनका वीजा 2 माह के लिए बढ़ा दिया गया। इसके बावजूद एबीसी न्यूज ने एक आर्टिकल
प्रकाशित किया और दावा किया कि भारत के विदेश मंत्रालय ने फोन करके अवनी को सूचित
किया था कि उनका वीजा नहीं बढ़ाया जा रहा।
खैर, इस प्रोपेगेंडा से इतर अवनी डायस से जुड़ा एक और
मामला भी है। उसने कनाडा में हरदीप निज्जर की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिस पर भारत सरकार रोक लगा चुकी है और यू-ट्यूब पर पर भी उसके मामले में नोटिस दिख रहा है। दरअसल, यो डॉक्यूमेंट्री न सिर्फ तथ्यात्मक रूप से गलत थी, बल्कि
भारत के संवेदनशील सीमाई इलाकों में गलत तरीके से फिल्माई गई थी। उन लोकेशन पर शूट
करने के लिए गलत तरीके से अनुमति हासिल की गई थी, जिसका
बीएसएफ ने भी विरोध किया था।
अवनी डायस भारत विरोधी, सनातन विरोधी
लेखों के लिए जानी जाती है। उसने कई बार प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की, लेकिन हर बार एक्सपोज होती रही। इसी साल मार्च में अवनी डायस ने ब्रिसबेस में स्थित श्री
लक्ष्मी नारायण मंदिर पर खालिस्तानी कट्टरपंथियों के हमले को नकारते हुए कट्टरपंथियों को क्लीनचिट देने की कोशिश की थी। उन्हें इसे हिंदू समूहों का ही हमला करार दे दिया
था। उनके दावों को खुद ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने एक्सपोज कर दिया था। एक फेसबुक
पोस्ट में ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने अवनी डायस और उनकी साथी नाओमी सेल्वारत्नम
को ‘ब्राउन सिपाही’ की संज्ञा दी थी।
समाचार सौजन्य: ऑप इंडिया
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