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हुए विराजमान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

भारतवर्ष। पौष मास के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि अर्थात 22 जनवरी 2024 ये वो दिनांक है जिसे इतिहास में स्वर्मिम अक्षरों में भारतवासी अपने अंतर आत्म में आत्मसात करके रखेंगे। इस पावन तिथि को भगवान श्रीराम के पुन: अयोध्या में विराजमान होने चिरकालीन काल खंड के रूप में जाना जाएगा।

अयोध्या की देव भूमि पर जन्म लेने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अयोध्या में नव निर्मित दिव्य और भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित हो गये। बाल रूप में विराजे श्याम वर्ण के कौशल्या नंदन राघव पांच वर्ष के हैं। इस अवसर को भारतवासियों ने जिस उत्साह और उल्लास के साथ मनाया वह अविस्मरणीय है। सोवमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान कार्यक्रम पूर्ण कराया और उन्होंने श्रीराम से क्षमा याचना भी करते हुए डबडबाई आंखों से कहां कि सदियों के विलंब के लिए वह श्रीराम के समक्ष क्षमा प्रार्थी हैं।

युग परिवर्तन सरीखे इस अनुष्ठान का साक्षी सारा देश बना और साथ ही साक्षी बने श्रीराम मंदिर प्रांगण में उपस्थित साधू, संत, सन्यासी और वह हजारों लोग जिन्होंने इस शुभ घड़ी में श्रीराम का दर्शन लाभ लिया।

केवल प्राण प्रतिष्ठा नहीं राष्ट्र प्रतिष्ठा

भारत जो कभी भारतवर्ष हुआ करता था जिसे फिर से उस युग में ले जाना है भारत विश्वगुरु था है और रहेगा बस हमें ये समझना और समझाना है। श्रीराम मंदिर का यह आयोजन केवल मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा नहीं ये राष्ट्र प्रतिष्ठा है क्योंकि जब राष्ट्र सनातनी हो तो वहां धर्म की स्थापना आवश्यक होती है और एक राजा ही अपनी नीति के द्वारा धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है और ये मंदिर उसी मार्ग स्थापना का उदाहरण है।

ये सदियों के धैर्य की घरोहर है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्बोधन में जिन शब्दावली का प्रयोग किया वह भविष्य के उन मानदंडों को रेखांकित करेगा जिसपर चलकर भारत भारतवर्ष बनेगा। उन्होंने कहां कि ये सदियों के धैर्य की धरोहर है अर्थात पांच सौ वर्षों से सनातन धर्मियों द्वारा की गयी उस प्रतीक्षा का फल है जिसके लिए लाखों बलिदान हुए पर न तो धैर्य खोया, न ही विश्वास खोया और न ही उम्मीद खोयी, जिसका परिणाम है ये श्रीराम मंदिर।

मोदी ने किया 11 दिनों का कठोर व्रत

चौदह वर्षों के वनवास के बाद जब श्रीराम अयोध्या लौटे थे तो उत्साह अपने चरम पर था, वहीं जब आज पांच सौ वर्षों के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर उनका मंदिर निर्मित हो सका है तो एक बार फिर उत्साह चरम पर है। ये मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा है तो इस अनुष्ठान को करने वाला भी सिद्ध पुरुष होना चाहिए, ये नरेंद्र मोदी बखूबी जानते है और उन्होंने ऐसा ही तप किया। मोदी ने 11 दिनों का उपवास किया, जबकी उन्हें मात्र तीन दिनों के व्रत का ही अनुपालन करने का नियम बताया गया था। मोदी ने इन ग्यारह दिनों तक अन्न का त्याक किया, जमीन पर सोए। इस क्रम में उन्होंने भारत के कई पौराणिक मंदिरों में भगवान से आशीर्वाद लिया जिसमें वह नासिक के कालाराम मंदिर में दर्शन पूजन किया, केरल के गुरुवायुर मंदिर, रंगनाथ स्वामी मंदिर, अरुल्मिगु श्रीरामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम आदि स्थान पर दर्शन पूजन किया।

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