जब विभाजन धर्म के आधार पर हुआ तो धर्म और मजहब को
पूरी तरह से अलग क्यों नहीं किया गया
मोनेश
श्रीवास्तव
सन
1947 में भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, और इस विभाजन का परिणाम ये हुआ.......
कि दो इस्लामिक मुल्क बने एक पाकिस्तान और दूसरा पूर्वी पाकिस्तान जिसे बाग्लादेश कहते
है.....लेकिन सवाल ये उठता है कि भारत का विभाजन आखिर धर्म के आधार पर हुआ क्यों....इसका
जवाब ये है कि मुसलमान हिन्दुओं के साथ नहीं रह सकते उन्हें अपना एक अलग मुल्क
चाहिए......ये मांग बंटवारे से पहले भारत में रहने वाले मुसलमानों ने की
थी.......तो इस वीडियों में आगे बढ़ने से पहले चैनल को सब्सक्राइब करले.....लाइक,
कमेंट और शेयर जरूर करें..... आप हमें आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं इस क्यूआर कोड
के माध्यम से......
जब विभाजन धर्म के आधार पर हुआ तो धर्म और मजहब को पूरी तरह से अलग क्यों नहीं किया गया......तो इसका जवाब आजादी के समय देश के दो बड़े नेताओं ने दे दिये थे एक थे सरदार पटेल और दूसरे डॉ. भीम राव अंबेडकर..... दोनों नेताओं ने कहां था कि जब देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ है तो जनसंख्या का आदान प्रदान भी इसी के हिसाब से होना चाहिए.....डॉ. अंबेडकर ने एक पुस्तक लिखी थी.......वहीं अंबेडकर जिन्होंने भारत का संविधान बनाया.....जिस संविधान दुहाई दी जाती है......उनकी पुस्तक का नाम है भारत अथवा पाकिस्तान का विभाजन.....जिसमें डॉ. अंबेडकर ने साफ शब्दों में कहा है कि जब देश का विभाजन धर्म के आधार पर हो रहा है तो आबादी का आदान प्रदान भी उसी आधार पर होना चाहिए, पाकिस्तान से सारे हिन्दूओं को भारत आ जाना चाहिए और भारत से सारे मुसलमान पाकिस्तान चले जाए, बिना इसके शांति स्थापित नहीं होगी....इसमें उन्होंने एक और बात कहीं है जिसपर गौर करना जरूरी है कि जबतक भारत में मुसलमान रहेंगे कभी भी शांति स्थापित नहीं हो सकती.... यहां इस इतिहास की बात का जिक्र करना इस लिए आवश्यक था क्योंकि जिन दो देशों को मुसलमानों ने भारत को तोड़कर लिया था वहां रहने वाला हिन्दु आज खतरें में है.....ताजा उदाहरण है बाग्लादेश का....... जहां पर मुस्लिम प्रधानमंत्री शेख हसीना का शासन था....फिर भी तख्तापलट हो गया है और वहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी जान बचाकर भागना पड़ा औऱ भारत में शरण लेनी पड़ी ....और भारत ने उन्हें शरण दी है.....यानी उनकी जान की रक्षा का जिम्मा भारत का है.......तख्तापलट क्यों हुआ, किसने किया....इसके पीछे किसका हाथ है औऱ भविष्य में क्या होने वाला है......... ये सारी बाते आपको समाचारों में मिल जायेंगी.............. इन सब बातों से इस वीडियो का कोई लेना देना नहीं है..... हमारी चिन्ता का विषय बाग्लादेश के हालात नहीं है बल्कि वहा रहने वाले हिन्दू है......उनका क्या होगा....
आप
जानते ही होंगे कि बाग्लादेश उस भूमि का हिस्सा था जिस भूमि का मूल धर्म सनातन रहा
है......जहां कई हजार वर्षों से हिन्दू रहता आ रहा है.....जिसपर आक्रांताओं का
आक्रमण होता रहा औऱ वह कब्जा करते गये..... और इन्हीं घुसपैठियों की नजर में
महात्मा बनने के लिए भारत के सत्ता लोभियों ने एक राजनैतिक अपराध किया जिसका दंड
पाकिस्तान औऱ बाग्लादेश में रह रहा हिन्दू आज भी भुगत रहा है..... हिन्दुओं को उन जाहिलों
के चंगुल में फंसने को मजबूर कर दिया है.....वह या तो अपनी मौत का इंतजार कर रहे
हैं या भारत भूमि पर वापिस लौटकर मोक्ष पाने की आस लगाये बैठे हैं............तो
सवाल उठता है कि उनकी रक्षा कौन करेगा....इसका जवाब होना चाहिए भारत, लेकिन क्या
ये संभव है....
बाग्लादेश अब एक आतंकी मुल्क बनने की ओर बढ़ चला है......तख्तापलट के बाद यहा एक आतंकी संगठन जमात-ए-इस्लामी समर्थित सरकार बनेगी......इससे भारत के लिए तो खतरा है ही,,,,,,लेकिन वर्तमान समय में सबसे बड़ी चिंता है बाग्लादेश में रह रहे हिन्दुओं की.....भारतीयों को अब बाग्लादेश में रहने वाले हिन्दुओं की चिन्ता सता रही है....तो इस विषय में भारत सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि वहां के हिन्दुओं की जान बच सके............भारत सरकार से हमारी अपील है कि वह बाग्लादेश में रह रहे हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाये वर्ना वहा रह रहा हिन्दु समापन की कगार पर तो खड़ा ही है.....क्योंकि आंकड़े तो यहीं बताते है 1947 में बाग्लादेश में 28 प्रतिशत हिन्दु थे अब मात्र 8 प्रतिशत बच गये है....जो भारत में शरण लेना चाहते हैं.....और ऐसा कोई दिन नहीं है जब पाकिस्तान औऱ बाग्लादेश में हिन्दु, सिख, जैन और बौद्ध की हत्या, धर्मपरिवर्तन और बलात्कार न होता हो.....क्या इनकी जान बचाने के लिए इन्हें भारत में शरण देनी चाहिए कमेंट करके जरूर बताईये.....क्योंकि अगर उनकी चिन्ता भारत नहीं करेगा तो दुनिया का कोई भी देश बाग्लादेश में हो रहे हिन्दुओं के नरसंहार पर अपनी नजर तक नहीं डालेगा.....जब से बाग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले हो रहे है पूरी दुनिया में इसपर कोई चर्चा नहीं हो रही है.....वहीं भारत में भी जो लोग बात-बात पर संविधान....औऱ असहिष्णुता की बीन बजाते हैं उनके भी मुंह को लकवा मार गया है.....यहां तक कि सोशल मीडिया पर बांग्लादेशी हिन्दुओं के नरसंहार पर बात करने वाले अकाउंट पर भी रोक लगायी जा रही है......
छात्र
आंदोलन की आड में जमाते इस्लामी के मुस्लिम कट्टरपंथियों ने तख्तापलट के बाद से बाग्लादेश
में सैकड़ों मंदिरों तो तोड़ दिया है, सैकड़ों हिन्दुओं के घरों को जला दिया गया
है, उनकी दुकानों को लूट लिया गया है....इतना ही नहीं वहां इस्लामिक जिहादियों
द्वारा हिन्दुओं को सीधा निशाना बनाया जा रहा है....लोगों की हत्या हो रही
है...महिलाओं और बच्चियों का बलात्कार हो रहा है...वहां वहीं सब हो रहा है जो हमास
ने इजराईल में घुसकर किया था.....हिन्दुओं के साथ ये सब उस जमीन पर हो रहा है
जिसकी पाकिस्तान से आजादी के लिए भारत ने सहयोग किया था.....
औऱ..इतना
सब होने के बाद भी...... भारत अपना धर्म निभाना नहीं भूला.....जिस शेख हसीना को
अमेरिका औऱ ब्रिटेन ने शरण देने से इनकार कर दिया है....उसी शेख हसीना जो कि एक
इस्लामिक मुल्क की प्रधानमंत्री है उन्होंने हिन्दुओं के देश भारत में शरण ले रखी
है.....जहां पर प्रधानमंत्री है नरेंद्र मोदी जिन्हें पूर्ण रूपेण हिन्दू वादी होने
का तमगा मिला हुआ है.......और उन्हीं के शासन काल में एक मुस्लिम देश की
प्रधानमंत्री ने शरण ली है....
शेख
हसीना ने उसी देश में शरण ली है जिस देश के मूल निवासी हिन्दू सनातन धर्मी है, उसी
देश के एक हिन्दूवादी प्रधानमंत्री ने उन्हें शरण दी है और शरण देने पर किसी हिन्दू
ने विरोध नहीं किया, लेकिन इन्हीं मुस्लिम शेख हसीना के इस्लामिक मुल्क बाग्लादेश
में लगातार हिन्दुओं की निर्मम हत्या होती ही जा रही है, हिन्दू महिलाओं की अस्मत लूटी
जा रही है..... जिस देश में हिन्दू काटे मारे जा रहे है उसी देश की मुस्लिम
प्रधानमंत्री जिसे मुस्लिम कट्टरपंथियों ने तख्तापलट कर उखाड़ फेका है और उसी
मुस्लिम प्रधानमंत्री को अपनी जान बचाकर उस हिन्दू देश में शहण लेनी पड़ती है जिस
जमीन से कटकर एक टूकड़ा बाग्ला देश बना है........... इतना कुछ कहने का उद्देश्य
मात्र इतना है कि भारत ने आज भी अपना धर्म निभाना नहीं भूला ......दुनिया में 57
इस्लामिक मुल्क है वहां शरण लेने कि शेख हसीना ने नहीं सोची....... अमेरिका औऱ
ब्रिटेन ने भी उन्हें घुसने नहीं दिया.....कहीं ठिकाना मिला है तो वह है भारत.....
पाकिस्तान जब भारत से अलग हुआ था तब पाकिस्तान में हिन्दुओं की जनसंख्या करीब 23 प्रतिशत थी और अब वहां मात्र डेढ़ प्रतिशत हिन्दू बचे हैं....वहीं बाग्लादेश की बात करे तो 1947 में हिन्दू 28 प्रतिशत थे और अब मात्र आठ प्रतिशत है........और आने वाले समय में इन दोनों मुल्कों से हिन्दुओं का सफाया कर दिया जाएगा...... चाहे वह बाग्लादेश हो या पाकिस्तान मजहबी कट्टरपंथ के चलते हिन्दूओं का नरसंहार होना आज भी जारी है......औऱ ध्यान रहे ये नरसंहार आगे भी जारी रहेगा।
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