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Defence Deal : भारत सरकार के इस फैसले से उड़ जाएगी पाक-चीन की नींद


-      26000 करोड़ के रक्षा सौदे को मोदी सरकार दी मंजूरी

 

XposeTimesNewsDesk

भारत ने पिछले कुछ वर्षों से अपने दुश्मन देशों की नींद उड़ा कर रख दी है। इसकी वजह है भारतीय सेना का रक्षा उपकरणों में प्रतिदिन मजबूत होना । इसी क्रम में सोमवार को भारत सरकार ने सुखोई-30MKI जेट विमानों को चलाने व उन्हें दुरुस्त रखने के लिए 240 एयरो-इंजन खरीदने के लिए करीब 26000 करोड़ रुपये के एक बड़े सौदे को मजूरी दी है।

यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब वायुसेना को चीन और पाकिस्तान से दोहरे खतरे से निपटने के लिए कम से कम 42 लड़ाकू विमानों की जरूरत है। वहीं वायुसेना के पास सिर्फ 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं। जाहिर सी बात है कि जब इंडियन एयरफोर्स का कुनबा मजबूत होने जा रहा है तो पाकिस्तान के साथ-साथ चीन को भी नींद उड़ेगी। अगर भारत हर क्षेत्र में मजबूत होता है तो चीन को अपनी लाल आंखे दिखाना और पाकिस्तान को अपनी नापाक हरकत बंद करनी होगी।

एयरो-इंजन में स्वदेशी सामग्री
न्यूज18 इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि 240 AL-31FP एयरो-इंजन रक्षा पीएसयू हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स से खरीदे जाएंगे, वहीं रूस से कुछ कल पुर्जे भी भारत खरीदेगा। एयरो-इंजन में 54% से अधिक स्वदेशी सामग्री लगायी जाएगी, इंजन HAL के कोरापुट डिवीजन में निर्मित किए जाएंगे। सरकार के इस फैसले से साफ पता चलता है कि सरकार स्वदेशी सामग्री पर जोर दे रही है।

 

कब तक डिलीवरी होगी पूरी?

जानकारी के अनुसार इन एयरो-इंजनों की डिलीवरी एक साल बाद शुरू होने वाली है, जबकि पूरा ऑर्डर आठ साल में पूरा किया जाएगा। भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल 259 सुखोई हैं, जिनमें से अधिकांश का निर्माण रूस से 12 बिलियन डॉलर से अधिक की लागत में HAL द्वारा किया गया है, जो इसके लड़ाकू बेड़े की रीढ़ हैं। पिछले कुछ वर्षो में दुर्घटनाग्रस्त हुए सुखोई की जगह लेने के लिए 12 नए सुखोई और संबंधित उपकरणों का ऑर्डर करीब 11,500 करोड़ रुपये में दिया जा रहा है।

फरवरी में CCS ने भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल लगभग 60 मिग-29 लड़ाकू विमानों के लिए 5,300 करोड़ रुपये के नए इंजनों को भी मंजूरी दी थी, जिसका निर्माण भी HAL द्वारा रूस के सहयोग से किया जाएगा। वायुसेना अब लागत कम करने और स्वदेशी सामग्री को बढ़ाने के लिए पहले के टुकड़ों के बजाय थोक में एयरोइंजन का ऑर्डर दे रही है। लड़ाकू विमानों के परिचालन जीवन के दौरान इंजनों को कम से कम दो से तीन बार बदलने की जरूरत होती है।

 

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